ak murkh ladka keise bangaya great writer kalidas

Read Time:5 Minute, 23 Second
एक मुर्ख लड़का कैसे बनगया महान कबि कालिदास

कहानी की शुरुआत 

एक गांव में एक बालक उसकी पिता माता के साथ रहता था, वो एक मुर्ख बालक था,वो पढाई में कमजोर था,इसलिए वो पढाई छोड़ दी थी,

वो बहत सर्मिला था, उसको हर काम में नाकामयाबी ही मिल रहीथी,


एक बार घर में खाना बनाने केलिए लकड़ी की जरूरत पड़ी, तो उसकी पिता ने उसे जंगल से कुछ लकड़ी लाने केलिए बोले, फिर वो मुर्ख बालक लकड़ी लाने केलिए जंगलमें चला गया,

उस जंगलमें गाओंके कुछ और लोग लकड़ी लाने केलिए गए हुएथे, फिर वो लड़का एक पेड़पे लकड़ी काटने केलिए चढ़गयी, और लकड़ी काटने लगी,

लेकिन कुछ देर बाद जॉब उस पेड़ के नीचेसे गुजरते हुए लोगों ने उसको देखा तो वो लोग हंसने लगे, कारण वो मुर्ख बालक जिस डाली पे बैठाथा वहीं डाली को ही काट रहा था,

उसके ऊपर हसते हुए लोगोको देखके वो निचे उतर गई, और जितना भी लकड़ी काटाथा उसको लेके घर आगयी,

लेकिन जिन लोगोंने उसको लकड़ी काटते हुए देखाथा वो लोग इस बारेमें गांव में सबको बातो बातोमें ही बताने लगे, और फिर गांव में सब लोग उसके ऊपर हंसरहेथे,

उस लड़के को ये बात बहुत बुरा लगा, और गाओंसे सुनिहुई बात को लेकर घरमे सब उसको डांटने लगे,इसलिए वो बालक रातको सो नहीं पाया, लगभग आधी रात को ही वो आत्महत्या करनेकी निर्णर्य ली,

उसको खुदखुसी कैसे करेगा इसके बारेमे सोचने लगा, फिर उसकी दिमागमे कुछ भी नहीं आया, फिर उसने निर्णय लिया पूर्ब दिशामें चलने केलिए जब तक उसकी मौत ना होजाये,

also,read 

 फिर वो मन हिमन माँ सरस्वती को उसकी खुदखुसी की जिम्मेदार ठहेराके पूर्ब की तरफ बढ़ता रहा,  फिर माँ सरस्वती जी की मनमे उस बालक की प्रति दया की भाबना आयी,

और  माँ सरस्वती जी उसको खुदकुसी से रोकने केलिए उसकी सामने प्रकट होगये, जैसेही माँ सरस्वती उसकी सामने प्रकट होगये उनको वो मुर्ख बालक पूछने लगा है माता आप कोन है, 

आप किस कारन मेरे सामने आरहेहैं, मुझे सिर्फ माँ सरस्वती से बात करनीहे अन्यथा में और किसीसे भी बात नहीं करूँगा,

फिर माँ सरस्वती उस बालक को बोले में ही वो हूँ, जिसे तुम ढूंढ रहेहो पुत्र, में तुम्हे बचाने केलिए यहाँपे आयाहूँ,

फिर वो बालक  बोलने लगा आप मुझे बचाके कोईभी उपकार नहीं कर रहेहैं, ऐसे मुर्ख बनके दुनिआ में जिनेसे लाख गुना अछा होगा अगर में मरजातिहुँ तो,

इसलिए मुझे मेरे रास्तेमे छोड़ दीजिए और आप यहांसे चलेजाईऐ,फिर माँ सरस्वती उस बालक से बोले तुम्हे क्या चाहिए बताओ में तुम्हे देने केलिए तेय्यार हूँ  !

ये बात सुनकर कालिदास बोलने लगे में पढाई से अनजान हूँ इसलिए मुझे आशिर्बाद कीजिए जैसे में एक लेखक बनसकू,

फिर माँ सरस्वती उस लड़के को आशिर्बाद करके जा रहेथे की वो लड़का माँ सरस्वती को बुलाया और बोला माँ में आपकेलिए कुछ रचना किआहूँ, माँ बोले ठीक है एक बार सुनालो मुझे,

फिर कालिदास बोलने लगे 
॥1॥ कज्वल पूरित लोचन धारं तनजीब सोभित मुकुता हारं  
     ॥ बीणा पुस्तक रंजीत हस्ते भगवती भारती देबि नमस्ते 

माँ सरस्वती ये बन्दना सुनके प्रसन्न तो हुए लेकिन क्रोधित भी हुए और एक श्राप दिएथे की तुम तुम्हारे ज्ञान से भलेही दुनिआ जित जाओगे लेकिन कभीभी उत्कल (odisha) में जित नहीं पाओगे,

फिर जब वो लड़का माँ से श्राप की कारन पूछा माँ उसको बतायेथे, कभी भी किसीकी बन्दना की शुरुआत उसकी मुँह से नहीं कीजाती है, बलकि उसकी चरणों से कीजाती है,

फिर आगे जाके वो लड़का एक महान कबि बनगई, जोकि कालिदास  के नामपे चर्चित थे,read more…  

*आपको ये कहानी कैसा लगा कमेंट में बताये !

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

You Might Also Like

2 Replies to “ak murkh ladka keise bangaya great writer kalidas”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *